प्रयागराज। राम वनगमन पथ पर सड़क के धंसने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। श्रृंगवेरपुर में सड़क धंसने को लेकर जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया गया तो उनके जवाब ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया। मौर्य ने कहा कि “सड़क बनेगी तो धंसेगी और जब धंसेगी तो दोबारा बनेगी।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जहां गुणवत्ता खराब पाई जाएगी, वहां जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कांग्रेस ने इसी बयान को पकड़कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जनता के पैसे से बनी सड़क का पहली बारिश में धंसना गंभीर मामला है और इसे सामान्य बताना जवाबदेही से बचने की कोशिश है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि निर्माण में गुणवत्ता की कमी थी तो ठेकेदार, अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
विवाद इसलिए भी बड़ा है क्योंकि राम वनगमन पथ को धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार अयोध्या से चित्रकूट तक प्रस्तावित मार्ग पर करीब 4,400 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
अब मामला सिर्फ सड़क की मरम्मत का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी धन और जवाबदेही का बन गया है। सवाल सीधा है—**सड़क का धंसना अगर सामान्य है, तो उसकी गुणवत्ता जांचने और जनता के पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?**

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