दालचीनी भारतीय रसोई का ऐसा लोकप्रिय मसाला है, जिसका इस्तेमाल मसालेदार व्यंजनों से लेकर मिठाइयों, चाय और कई तरह के पकवानों में किया जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद भोजन को खास बनाते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाली हर दालचीनी एक जैसी नहीं होती। मुख्य रूप से इसकी दो किस्में प्रचलित हैं—सीलोन दालचीनी और कैसिया दालचीनी।
सीलोन दालचीनी को आमतौर पर बेहतर विकल्प माना जाता है। इसकी परतें पतली होती हैं और यह कई कागज जैसी परतों में लिपटी दिखाई देती है। इसका रंग हल्का भूरा और स्वाद अपेक्षाकृत हल्का व मीठा होता है।
वहीं कैसिया दालचीनी की छाल मोटी, कठोर और गहरे लाल-भूरे रंग की होती है। यह एक मोटी परत या ट्यूब जैसी दिखाई देती है और इसका स्वाद अधिक तेज होता है। कैसिया में कूमारिन नामक तत्व अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, इसलिए इसे नियमित रूप से बड़ी मात्रा में लेना उचित नहीं माना जाता।
दालचीनी खरीदते समय उसकी बनावट पर ध्यान दें। पतली, कई परतों वाली और आसानी से टूटने वाली दालचीनी आमतौर पर सीलोन किस्म हो सकती है, जबकि मोटी और कठोर छाल कैसिया होने की संभावना रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दालचीनी को मसाले के रूप में सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना बेहतर है। किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे अधिक मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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