लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर चल रहा सियासी घटनाक्रम अब एक और मोड़ पर पहुंच गया है। मायावती की शर्त के बाद आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मायावती को संबोधित करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी।
दरअसल, मायावती ने बुधवार को कहा था कि यदि अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़कर पूरी तरह राजनीति से संन्यास लेते हैं, तभी आकाश आनंद को बसपा में दोबारा जिम्मेदारी देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। मायावती ने सिद्धार्थ पर पार्टी और बहुजन आंदोलन से ज्यादा निजी हितों को महत्व देने का आरोप भी लगाया था।
इसके बाद अशोक सिद्धार्थ ने अपने बयान में मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके आदेश उनके लिए सर्वोपरि हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी पार्टी हित के खिलाफ काम नहीं किया और आकाश आनंद को गुमराह करने के आरोपों को भी खारिज किया।
सिद्धार्थ ने मायावती से यह भी आग्रह किया कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए। उनका कहना है कि आकाश के भविष्य के बारे में फैसला मायावती को ही करना है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद मायावती आकाश आनंद को फिर बड़ी जिम्मेदारी देंगी? 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के भीतर यह फैसला पार्टी के नेतृत्व और भविष्य की रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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