हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा सदियों पुरानी है। विवाह हो, गृह प्रवेश, नया कारोबार या कोई धार्मिक अनुष्ठान—सबसे पहले गणपति का स्मरण किया जाता है। इसी वजह से भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ और ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
गणेश जी को प्रथम पूज्य बनाए जाने को लेकर एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा सुनाई जाती है। मान्यता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के सामने यह प्रश्न उठा कि दोनों पुत्रों में श्रेष्ठ कौन है। तब तय हुआ कि जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके लौटेगा, वही विजेता माना जाएगा।
कार्तिकेय अपने तेज गति वाले मयूर पर सवार होकर संसार की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेश जी का वाहन मूषक था। उन्होंने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया और भगवान शिव तथा माता पार्वती की सात बार परिक्रमा कर ली। उनका कहना था कि माता-पिता में ही पूरा संसार समाया हुआ है।
गणेश जी की बुद्धिमत्ता और माता-पिता के प्रति भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि तीनों लोकों में किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा होगी। तभी से गणपति को प्रथम पूज्य मानने की परंपरा चली आ रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश पूजा का उद्देश्य केवल विघ्न दूर करना ही नहीं, बल्कि शुभ कार्य की शुरुआत बुद्धि, विवेक और मंगल भावना के साथ करना भी माना जाता है।

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