भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर बैंकों और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ तय ₹6,203 करोड़ की देनदारी के मुकाबले बैंकों और सरकार ने उनकी संपत्तियों से ₹14,000 करोड़ से ज्यादा की वसूली कर ली है। अब उनका सवाल है कि यदि देनदारी से कहीं अधिक रकम वसूल हो चुकी है, तो अतिरिक्त राशि का हिसाब और उन्हें राहत कब मिलेगी।
मामला अब फिर अदालत तक पहुंच चुका है। अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने माल्या की ओर से कहा गया कि बैंकों के समूह ने करीब ₹15,000 करोड़ की वसूली कर ली है, जबकि मूल न्यायिक देनदारी करीब ₹6,203 करोड़ थी। अदालत ने इस दावे को फिलहाल स्वीकार नहीं किया, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक और ईडी से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
दरअसल, ₹6,203 करोड़ का आंकड़ा ऋण वसूली न्यायाधिकरण द्वारा तय देनदारी से जुड़ा है, जिसमें करीब ₹1,200 करोड़ ब्याज भी शामिल था। दूसरी ओर, वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया था कि माल्या से जुड़ी ₹14,131.60 करोड़ की संपत्तियां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस की गईं।
यही अंतर अब पूरे विवाद का केंद्र है—वसूली कितनी हुई, किस मद में हुई और वास्तविक बकाया कितना है? माल्या रिफंड की मांग कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला अदालत और संबंधित एजेंसियों के रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।

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