नई दिल्ली। भारत के बड़े मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि उनके पास विशाल वित्तीय और अचल संपत्तियां भी हैं। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से हाल में जारी आंकड़ों ने मंदिरों की संपत्ति को लेकर चर्चा फिर तेज कर दी है। हालांकि अलग-अलग मंदिरों के उपलब्ध आंकड़ों के वर्ष अलग हैं, इसलिए इन्हें सीधे एक-दूसरे की संपत्ति की रैंकिंग मानना सही नहीं होगा।
पुरी का जगन्नाथ मंदिर—31 अगस्त 2026 तक मंदिर के बैंक खातों में करीब 1,911.80 करोड़ रुपये जमा थे। इनमें 1,811.10 करोड़ रुपये की सावधि जमा शामिल है। मंदिर के नाम देशभर में 60,821 एकड़ जमीन दर्ज है। रत्न भंडार में सोने, हीरे और अन्य बहुमूल्य आभूषण हैं, जिनकी सूची तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
अयोध्या का राम मंदिर—श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पास मार्च 2026 में करीब 1,882 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि बताई गई थी। वर्ष 2025-26 में न्यास की आय करीब 237 करोड़ रुपये रही। मंदिर के बहुमूल्य आभूषणों की पूरी कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है।
गुरुवायूर मंदिर—उपलब्ध सूचना के अनुसार मंदिर के विभिन्न बैंक खातों में करीब 1,737 करोड़ रुपये जमा थे और उसके पास लगभग 271 एकड़ जमीन बताई गई है। यह आंकड़ा पुराने अभिलेखों पर आधारित है।
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम—उपलब्ध पुराने आंकड़ों में टीटीडी की बैंक जमा राशि करीब 16,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके अलावा सोने और अन्य संपत्तियों की बड़ी मात्रा है। 2026-27 के लिए टीटीडी का बजट 5,456.26 करोड़ रुपये मंजूर किया गया था।
एक नजर में
मंदिर
बैंक में उपलब्ध राशि
जमीन
जगन्नाथ, पुरी
₹1,911.80 करोड़
60,821 एकड़
राम मंदिर न्यास, अयोध्या
₹1,882 करोड़
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गुरुवायूर मंदिर
₹1,737.04 करोड़
271.05 एकड़
तिरुपति टीटीडी
करीब ₹16,000 करोड़*
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*तिरुपति और कुछ अन्य आंकड़े पुराने हैं; इसलिए वर्तमान संपत्ति की सटीक तुलना नहीं की जा सकती।
इन मंदिरों की आमदनी मुख्य रूप से भक्तों के दान-चढ़ावे, बैंक जमा के ब्याज, जमीन/संपत्तियों से आय और कुछ मामलों में अन्य संस्थागत स्रोतों से होती है। पुरी मंदिर प्रशासन ने खदानों और पत्थरों से आय तथा सरकारी अनुदान को भी आय के स्रोतों में शामिल किया है।
**यानी आस्था के इन केंद्रों के पास सिर्फ श्रद्धा की विरासत नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय ताकत और विशाल जमीन भी है।**

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