भारत में नवजात और छोटे बच्चों की देखभाल में कई पारंपरिक नुस्खे आज भी अपनाए जाते हैं। इनमें बच्चे को जन्म के कुछ महीनों बाद शहद चटाने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चे को शहद देना सुरक्षित नहीं माना जाता।
शहद में Clostridium botulinum के बीजाणु मौजूद हो सकते हैं। बड़े बच्चों और वयस्कों का पाचन तंत्र इन्हें संभालने में सक्षम होता है, लेकिन छोटे शिशुओं की आंतों में ये बीजाणु बढ़कर बोटुलिज्म नामक गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं।
शिशु बोटुलिज्म में कब्ज, दूध पीने में परेशानी, कमजोर रोना, चेहरे के भाव कम होना, शरीर में कमजोरी और निगलने या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।
इसलिए एक साल की उम्र पूरी होने से पहले बच्चे को शहद न दें, चाहे वह घर का हो, जैविक हो या किसी बुजुर्ग द्वारा पारंपरिक उपाय के तौर पर सुझाया गया हो।
बच्चे के शुरुआती महीनों में क्या खिलाना है, इसकी जानकारी बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह और उम्र के अनुसार निर्धारित आहार से लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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