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नैरोबी। केन्या के राष्ट्रपति ने भारत की के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए देश में उसकी गतिविधियां बंद करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति रूटो का आरोप है कि कंपनी ने लेक मगाडी के संसाधनों का लंबे समय तक इस्तेमाल किया, लेकिन काजियाडो क्षेत्र में अपेक्षित औद्योगिक विकास और स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन नहीं किया।
काजियाडो काउंटी में एक कार्यक्रम के दौरान रूटो ने तीखे शब्दों में कहा कि कंपनी के पास करीब 100 साल पुरानी रियायत और संचालन का इतिहास रहा, लेकिन क्षेत्र में बड़े उद्योग स्थापित नहीं किए गए। उन्होंने सवाल उठाया—“क्या हम दूसरों के गुलाम हैं?” रूटो ने कहा कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों को केवल बाहर भेजने के बजाय स्थानीय उद्योग और रोजगार के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।
लेक मगाडी से मिलने वाले खनिज से सोडा ऐश तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग कांच, डिटर्जेंट और रासायनिक उद्योगों में होता है। राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि सरकार नए निवेशकों को लाएगी और उनसे काजियाडो में बड़ा कांच कारखाना तथा रासायनिक प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने की अपेक्षा करेगी।
इससे पहले जुलाई में केन्याई सरकार ने टाटा केमिकल्स मगाडी की गतिविधियों और सोडा ऐश के निर्यात पर भी कार्रवाई की थी। दूसरी ओर, टाटा केमिकल्स ने कहा है कि वह केन्याई सरकार के अधिकार का सम्मान करती है और मामले के समाधान के लिए कानूनी व नियामकीय माध्यमों से बातचीत जारी रखेगी।
**यह मामला अब सिर्फ एक कंपनी के कारोबार का नहीं, बल्कि अफ्रीकी देशों में प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिल रहा है—इस बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।**

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