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पूर्वी सीमा पर केंद्र की पैनी नजर

 


एक महीने में दूसरी बार उत्तर बंगाल पहुंचे अमित शाह, सुरक्षा एजेंडे पर मंथन


नई दिल्ली/बौद्धिक प्रतिकार। पूर्वी भारत की संवेदनशील सीमाओं को लेकर केंद्र सरकार ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर उत्तर बंगाल पहुंचे हैं। करीब एक महीने के भीतर उनका यह दूसरा दौरा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर केंद्र की गंभीरता साफ दिखाई दे रही है।



दौरे के केंद्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारा है। यह संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसके अलावा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।


गृह मंत्री सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ स्थिति की समीक्षा करेंगे। घुसपैठ, तस्करी, हथियारों की आवाजाही, मादक पदार्थों के कारोबार और सीमा पार होने वाले अपराधों को रोकना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।


सरकार अब केवल जवानों की तैनाती तक सीमित रहने के बजाय तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं के बेहतर इस्तेमाल और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दे रही है।


उत्तर बंगाल की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाती है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार। ऐसे में छोटी सी सुरक्षा चूक भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है।


अमित शाह का लगातार उत्तर बंगाल पहुंचना संकेत देता है कि केंद्र अब इस पूरे क्षेत्र को सामान्य प्रशासनिक मुद्दे की बजाय रणनीतिक सुरक्षा क्षेत्र के रूप में देख रहा है। असली चुनौती यह होगी कि समीक्षा और बैठकों के फैसले जमीन पर कितनी तेजी से लागू होते हैं।

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