प्रणव बजाज
इंदौर। ड्रग्स से शुरू हुई जांच अब ऑनलाइन सट्टेबाजी के ऐसे नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जिसके तार शहर से बाहर और कथित तौर पर विदेश तक जाने की आशंका पुलिस तलाश रही है। नाना पटवारी से जुड़े मामले की जांच के दौरान मिले मोबाइल और डिजिटल सुरागों ने इंदौर के ऑनलाइन बैटिंग कारोबार की कई परतें खोल दी हैं। पुलिस ने संगठित सट्टेबाजी के मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
पुलिस जांच में नाना पटवारी के मोबाइल से ऑनलाइन सट्टे के एप और उनसे जुड़े डिजिटल सुराग मिलने की बात सामने आई है। एप हटाए जाने के बावजूद मोबाइल में मौजूद संपर्क और अन्य डेटा जांचकर्ताओं के लिए अहम कड़ी बने। इसी आधार पर स्थानीय एजेंटों, बुकी और बेटिंग आईडी उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है। जुलाई में पुलिस जांच से यह भी सामने आया था कि कुछ आरोपी ऑनलाइन बेटिंग मंचों के कमीशन एजेंट के रूप में काम करते थे और उन्हें वाट्सऐप के जरिए बेटिंग लिंक तथा आईडी उपलब्ध कराई जाती थीं।
योगेश राठी का नाम फिर चर्चा में
सांईबाबा नगर क्षेत्र के योगेश राठी का नाम भी जांच के दौरान सामने आने की रिपोर्ट है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नाना के मोबाइल में राठी से ऑनलाइन सट्टेबाजी से संबंधित चैट के अंश मिलने की बात कही गई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पारंपरिक मटके और ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग के बीच कोई साझा नेटवर्क या आर्थिक कड़ी है या नहीं। हालांकि राठी की किसी आपराधिक भूमिका को अभी जांच पूरी होने से पहले निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा।
संजय वर्मा का नाम भी जांच के घेरे में
ऑनलाइन सट्टे की पड़ताल के साथ संजय वर्मा का नाम भी सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में उसे कैटरिंग गतिविधियों और कथित पार्टियों से जोड़कर आरोप लगाए गए हैं। लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुलिस पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का जांच में नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता।
दुबई-नेपाल की कड़ी सबसे बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल कथित विदेशी संपर्कों को लेकर है। पुलिस की जांच में कुछ आरोपियों के विदेशी सट्टेबाजों से संपर्क की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि ये संपर्क केवल बेटिंग एप, आईडी और तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित थे या विदेश में बैठे लोग पूरे नेटवर्क के संचालन में भी भूमिका निभा रहे थे।
अगर डिजिटल साक्ष्य इस कड़ी की पुष्टि करते हैं तो इंदौर का ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क सिर्फ स्थानीय कारोबार नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित डिजिटल सट्टेबाजी तंत्र से जुड़ा मामला बन सकता है।
गिरफ्तारियां बढ़ीं, लेकिन असली सरगना कौन?
राजेंद्र नगर पुलिस ने इस मामले में अमित कौशल, संजय उर्फ रॉनी कौशल, प्रीतेश त्रिपाठी, दिनेश उर्फ लल्ला चौहान, मानव गंगवानी, मनीष पमनानी, निखिल चौहान, पिंकेश माहेश्वरी और निलेश बागड़ी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। हाल में राहुल निंबोला, धर्मेंद्र खींची उर्फ धम्मू भाट और स्वप्नदीप उर्फ सनी शिंदे की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की गई।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—स्थानीय एजेंटों के ऊपर कौन है? पैसा किसके पास पहुंचता था? बेटिंग आईडी कहां से आती थी और विदेशी संपर्कों के पीछे असली चेहरे कौन हैं?
सट्टे का खेल अब गलियों के मटके से निकलकर मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच चुका है। यदि जांच डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल चैट और विदेशी संपर्कों तक पहुंचती है, तो इंदौर के इस कथित नेटवर्क का असली आकार सामने आ सकता है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। आरोपियों की भूमिका अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

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