नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के बीच कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने न्यूयॉर्क के मेयर पद के उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भागवत की अमेरिका यात्रा और उनके विचारों को लेकर टिप्पणी की थी।
पित्रोदा ने कहा कि ममदानी की बात को उनकी निजी राय के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ये उनकी निजी राय थी।” इसके साथ ही पित्रोदा ने अपने विचार स्पष्ट करते हुए कहा कि वह धर्मनिरपेक्ष भारत में विश्वास करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश होना चाहिए जहां धर्म, जाति, भाषा या राज्य के आधार पर किसी तरह का भेदभाव न हो। पित्रोदा का यह बयान ऐसे समय आया है जब भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज है।
भागवत का अमेरिका दौरा संघ के वैश्विक संपर्क और भारतीय मूल के लोगों के बीच संवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, ममदानी के बयान ने इस यात्रा को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।
पित्रोदा के बयान से भारत में भी बहस का एक नया कोण सामने आया है। एक तरफ संघ भारत की सांस्कृतिक पहचान और हिंदू विचार पर जोर देता रहा है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से जुड़े पित्रोदा ने धर्मनिरपेक्षता और समानता को भारत की मूल पहचान बताया।
अब सवाल यही है कि क्या यह केवल अलग-अलग नेताओं की व्यक्तिगत राय तक सीमित रहेगा या भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर भारत-अमेरिका के राजनीतिक विमर्श में इसका असर आगे भी दिखाई देगा।

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