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मुंडे कांग्रेस में आते-आते रह गए!

महाराष्ट्र की राजनीति का एक पुराना और बेहद दिलचस्प अध्याय फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने दावा किया है कि भाजपा के दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे एक समय कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार थे। मामला इतना आगे बढ़ चुका था कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उन्हें केंद्र में मंत्री पद देने पर भी विचार हुआ था। 



यह घटनाक्रम 2011 का बताया जाता है, जब मुंडे भाजपा से नाराज चल रहे थे। उस समय कांग्रेस के नेताओं और मुंडे के बीच बातचीत आगे बढ़ी थी। रिपोर्टों के अनुसार मुंडे चाहते थे कि कांग्रेस में आने के साथ ही उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में सम्मानजनक जिम्मेदारी मिले। कांग्रेस की ओर से शुरुआती तौर पर मंत्री पद को लेकर बातचीत भी हुई थी। 


मामला आखिरकार तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तक पहुंचा। सिंह ने तत्काल मुंडे को मंत्री बनाने पर सहमति नहीं दी। उनका तर्क राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा था—पहले मुंडे कांग्रेस में शामिल हों, अपनी भाजपा की लोकसभा सीट छोड़ें, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लौटें और उसके बाद मंत्री बनाए जाने पर विचार हो। 


इसके बाद मुंडे ने भाजपा में ही बने रहने का फैसला किया और तत्कालीन भाजपा नेता सुषमा स्वराज से मुलाकात की। 


अब वर्षों बाद चव्हाण के खुलासे ने उस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम को फिर जिंदा कर दिया है। हालांकि मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने इस दावे पर कहा कि उनके पिता “कमल में ही जन्मे और कमल में ही विसर्जित हुए।” 


राजनीति में कुछ फैसले सिर्फ सरकारें नहीं, पूरा राजनीतिक भविष्य बदल देते हैं—मुंडे का कांग्रेस में न जाना भी महाराष्ट्र की राजनीति का ऐसा ही एक मोड़ था।

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