नई दिल्ली। चुनाव में काले धन और अवैध प्रलोभन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में बेहिसाब पैसा मतदाता की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करता है और इससे लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के दौरान जब्त नकदी या अन्य संदिग्ध संपत्ति की जानकारी 24 घंटे के भीतर जिला मजिस्ट्रेट तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की जांच को सामान्य तौर पर एक साल के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यदि किसी मामले में जांच लंबी खिंचती है तो उसके कारण दर्ज करने होंगे और संबंधित जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी।
अदालत ने हाई कोर्टों से कहा है कि वे चुनाव से जुड़े ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई और निपटारे के लिए विशेष अदालतें या नामित अदालतें तय कर सकते हैं। खास तौर पर उम्मीदवारों, मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया है, क्योंकि चुनाव का चक्र लगातार चलता रहता है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था करते हुए कहा कि किसी चुनावी चक्र में उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने के लिए संबंधित हाई कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य राजनीतिक बदलाव के बाद चुनाव संबंधी गंभीर मामलों को मनमाने तरीके से वापस लिए जाने पर रोक लगाना है।
अदालत के सामने पेश रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश चुनावी पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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