लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। उनकी नियुक्ति को संगठन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है
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बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ। उन्होंने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाई। 2014 में पहली बार बस्ती से लोकसभा चुनाव जीता और 2019 में लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। 2024 में लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद संगठन में उनकी भूमिका बनी रही।
द्विवेदी को भाजपा के संगठनात्मक काम का लंबा अनुभव है। वह राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं, बिहार के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वर्तमान में असम के प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी थी।
उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की चर्चा भी शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषणों में उन्हें भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल किया जा रहा है। 2027 के चुनाव से पहले भाजपा अलग-अलग सामाजिक वर्गों के नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह देकर अपना आधार मजबूत करने की कोशिश करती दिख रही है। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि द्विवेदी की नियुक्ति केवल ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के उद्देश्य से की गई है।
अब चुनौती उनके सामने राष्ट्रीय संगठन की जिम्मेदारी निभाने के साथ उत्तर प्रदेश में पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक संपर्क को मजबूत करने की होगी। 2027 के विधानसभा चुनाव में यह भूमिका कितनी निर्णायक साबित होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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