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क्राइम ब्रांच पर रिश्वत का दाग, तत्कालीन टीआई समेत चार पर एफआईआर

 


इंदौर। अपराधियों पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन अधिकारियों पर ही रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। लोकायुक्त पुलिस ने तत्कालीन निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव समेत चार लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।



लोकायुक्त के अनुसार, एक युवक को कार्रवाई से बचाने और उसे छोड़ने के बदले 1 लाख 20 हजार रुपये मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता प्रीति हजारी ने 2 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत के साथ कथित लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए थे।


जांच में सामने आया कि कथित रकम में से 50,800 रुपये यूपीआई के माध्यम से दीपक पटेल के खाते में भेजे गए, जबकि 70 हजार रुपये नकद दिए जाने का आरोप है। लोकायुक्त ने शिकायत के सत्यापन और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद 24 अगस्त को प्रकरण दर्ज किया।


एफआईआर में तत्कालीन क्राइम ब्रांच निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव, तत्कालीन आरक्षक अभय सिंह, विकास सेंधव और इंदौर निवासी दीपक पटेल को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।


अब लोकायुक्त की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर हुई, रकम किसके निर्देश पर ली गई और चारों आरोपियों की भूमिका क्या थी। डिजिटल भुगतान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच में अहम कड़ी माने जा रहे हैं।


सवाल बड़ा है—जिस क्राइम ब्रांच पर अपराधियों पर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी है, अगर उसी के अधिकारियों पर कार्रवाई से बचाने के बदले रकम मांगने के आरोप लगें, तो पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?


हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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