भोपाल। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने मिलावट के कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई में करीब 5.61 करोड़ रुपये मूल्य का संदिग्ध मावा, पनीर और घी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के संदिग्ध पाए जाने से सवाल उठ रहा है कि आखिर त्योहारों के दौरान आम लोगों की थाली तक मिलावटी सामान पहुंचने से रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है।
मावा, पनीर और घी जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्री का इस्तेमाल त्योहारों में कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में मिलावट केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सीधे उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन जाती है। संदिग्ध सामग्री की जब्ती के बाद अब उसके नमूनों की जांच और संबंधित कारोबारियों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
मामले में एक और बड़ा सवाल अधिकारियों की कार्रवाई की गति और सख्ती को लेकर है। आरोप लगाया जा रहा है कि महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जिस तरह बड़े पैमाने पर कार्रवाई का साहस दिखाया है, वैसी कठोरता मध्य प्रदेश में दिखाई नहीं दे रही।
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल: अगर 5.61 करोड़ रुपये की संदिग्ध खाद्य सामग्री कार्रवाई में पकड़ी जा सकती है, तो सवाल यह है कि यह सामग्री बाजार तक पहुंचने से पहले क्यों नहीं रोकी गई? त्योहारों के बाद केवल जब्ती और नमूने लेने के बजाय क्या सरकार मिलावटखोरों पर ऐसी कार्रवाई करेगी जिससे पूरा नेटवर्क टूटे?
त्योहारों में मिठाई और डेयरी उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह कार्रवाई चेतावनी भी है। अब असली परीक्षा खाद्य विभाग की है—क्या कार्रवाई सिर्फ जब्ती तक रहेगी या मिलावट के पीछे बैठे कारोबारियों तक भी पहुंचेगी?

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