ग्वालियर। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एलईडी लाइटों की खरीद को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार का स्मार्ट मॉडल’ करार दिया है। विवाद मुख्य रूप से एलईडी की गुणवत्ता, उपकरणों की क्षमता और खरीदी गई दरों में कथित अंतर को लेकर है।
आरोप है कि परियोजना के तहत जिन एलईडी उपकरणों की खरीद की गई, उनकी वास्तविक गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही बाजार दर और सरकारी खरीद दर के बीच कथित अंतर ने भी पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले ने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में होने वाले सरकारी खर्च की निगरानी पर भी बहस तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की खरीद में निविदा प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही और उपकरणों की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई।
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल: स्मार्ट सिटी के नाम पर अगर जनता के पैसे से खरीदे गए उपकरणों की गुणवत्ता और कीमत पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या सरकार खरीद की पूरी प्रक्रिया, निविदा दस्तावेज, तकनीकी जांच रिपोर्ट और भुगतान का विवरण सार्वजनिक करेगी?
सिंघार के आरोपों के बाद अब निगाहें सरकार और स्मार्ट सिटी प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एलईडी खरीद का मामला नहीं, बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल होगा।

Post a Comment