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28 साल बाद खुली वंधामा नरसंहार की फाइल, अब पुराने सुरागों की होगी पड़ताल

 

 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या का मामला फिर जांच के घेरे में, टीका लाल टपलू और नीलकंठ गंजू हत्याकांड की भी पड़ताल


श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के दौर में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर किए गए पुराने हत्याकांड अब फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी ने 1998 के वंधामा नरसंहार की जांच करीब 28 साल बाद दोबारा शुरू कर दी है। गांदरबल जिले के वंधामा में 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी



जांच एजेंसी अब पुराने पुलिस रिकॉर्ड, मामले से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य उन आतंकियों और कथित सहयोगियों की भूमिका सामने लाना है, जिनका संबंध इस हत्याकांड से रहा हो सकता है। हाल के दिनों में घाटी में इस मामले से जुड़े स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई भी की गई है।


वंधामा मामला अकेला नहीं है। जांच एजेंसी ने आतंकवाद के दौर में हुई कई लक्षित हत्याओं की फाइलें फिर खोलने की प्रक्रिया तेज की है। इनमें कश्मीरी पंडित नेता टीका लाल टपलू, न्यायाधीश नीलकंठ गंजू, नर्स सरला भट तथा लेखक सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्याओं से जुड़े मामले शामिल हैं।


सरला भट हत्याकांड में जांच एजेंसी पहले ही 737 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। अब वंधामा मामले में तीन दशक पुराने सुरागों को जोड़ने की कोशिश हो रही है।


सवाल सिर्फ फाइल खुलने का नहीं, न्याय तक पहुंचने का है। इतने वर्षों बाद जांच फिर शुरू होने से पीड़ित परिवारों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होगी कि जांच एजेंसी पुराने मामलों के दोषियों और उनके नेटवर्क तक कितनी दूर पहुंच पाती है।

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