मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय में करीब 30 साल पुरानी भर्ती व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। अवर सचिव, उप सचिव और अपर सचिव स्तर के पदों पर नियुक्तियां मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराने के विकल्प पर मंथन चल रहा है। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना बताया जा रहा है।
विधानसभा सचिवालय में इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में पीएससी जैसी स्वतंत्र चयन संस्था के माध्यम से भर्ती कराने का विकल्प सामने आने से व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है। माना जा रहा है कि इससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और नियुक्तियों में पक्षपात या सिफारिश जैसे आरोपों की गुंजाइश कम हो सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी प्रशासनिक दक्षता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रमुख पदों पर भर्ती पीएससी के माध्यम से कराने के विकल्प पर विचार किए जाने की बात कही है। हालांकि अंतिम निर्णय होने से पहले भर्ती नियमों, पदों की प्रकृति और विधानसभा सचिवालय की संवैधानिक स्वायत्तता से जुड़े पहलुओं का परीक्षण जरूरी होगा।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो विधानसभा सचिवालय की भर्ती प्रक्रिया में यह एक महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव होगा। सवाल यही है कि क्या नई व्यवस्था केवल कुछ चुनिंदा पदों तक सीमित रहेगी या आने वाले समय में सचिवालय की अन्य नियुक्तियों के लिए भी प्रतियोगी चयन प्रक्रिया का रास्ता खुलेगा।

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