भोपाल। राजधानी में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। शहर में फिर चार मरीजों के संक्रमित मिलने की जानकारी सामने आई है। बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच श्वसन संबंधी संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध ताजा सार्वजनिक स्रोतों में इन चार मामलों को किसी नए एच-3 एन-2 वेरिएंट से जोड़ने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।
एच-3 एन-2 सहित इन्फ्लुएंजा संक्रमण में सामान्य तौर पर अचानक बुखार, खांसी और गले में खराश प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। इसके साथ शरीर में दर्द, थकान, सिरदर्द और नाक बहने जैसी शिकायत भी हो सकती है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
भोपाल में मानसून के दौरान वायरल और श्वसन संक्रमण को लेकर पहले से सतर्कता जरूरी है। स्थानीय स्वास्थ्य जोखिम के उपलब्ध संकेतों में भी इस समय बुखार संबंधी बीमारियों का दबाव दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि लगातार या तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या लगातार बढ़ती खांसी को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें। संक्रमित व्यक्ति भीड़ से दूरी बनाए और चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करे।
सवाल यह है कि भोपाल में सामने आ रहे मामलों की वास्तविक संख्या कितनी है और क्या स्वास्थ्य विभाग इन संक्रमित मरीजों के नमूनों की जीनोम या विस्तृत जांच कर नए वेरिएंट की पुष्टि कर रहा है?

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