सावन में रुद्राक्ष पहनने की धार्मिक मान्यता, धारण करने से पहले शुद्धि और मंत्र जाप की परंपरा
नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रुद्राक्ष को भगवान शिव से जुड़ा पवित्र माना गया है और इस दौरान इसे धारण करना शुभ माना जाता है। हालांकि राशि के अनुसार रुद्राक्ष चुनने की मान्यताएं ज्योतिष पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
राशि अनुसार रुद्राक्ष: मेष के लिए तीन मुखी, वृषभ के लिए छह मुखी, मिथुन के लिए चार मुखी, कर्क के लिए दो मुखी, सिंह के लिए पांच मुखी, कन्या के लिए चार मुखी, तुला के लिए छह मुखी, वृश्चिक के लिए तीन मुखी, धनु के लिए पांच मुखी, मकर के लिए सात मुखी, कुंभ के लिए सात मुखी और मीन राशि के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष की ज्योतिषीय मान्यता प्रचलित है।
कैसे धारण करें?
रुद्राक्ष को गंगाजल या पंचामृत से शुद्ध कर भगवान शिव की पूजा करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने की परंपरा है। कुछ परंपराओं में सोमवार को धारण करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों पर आधारित परंपराओं में टूटे या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष को धारण न करने और उसे स्वच्छ हाथों से रखने की सलाह मिलती है।
ध्यान रखें: रुद्राक्ष को आस्था और धार्मिक परंपरा के रूप में धारण करें; किसी बीमारी के इलाज या निश्चित चमत्कारी परिणाम का दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

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