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आईवीएफ के बाद मां के लिए स्तनपान कितना आसान? विज्ञान ने दूर किया बड़ा भ्रम

कई महिलाओं को रहता है डर, लेकिन शोध में तस्वीर कुछ और


आईवीएफ के जरिए मां बनने वाली महिलाओं के सामने बच्चे के जन्म के बाद एक नया सवाल खड़ा होता है—क्या वह अपने बच्चे को सामान्य रूप से स्तनपान करा पाएंगी? क्या आईवीएफ के दौरान दिए गए हार्मोन और दवाओं का असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है?



वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक सिर्फ आईवीएफ से गर्भधारण होने का मतलब यह नहीं है कि महिला स्तनपान नहीं करा पाएगी। स्विट्जरलैंड में हुए एक अध्ययन में आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली 93.4 प्रतिशत महिलाओं ने स्तनपान शुरू किया, जबकि प्राकृतिक गर्भधारण वाली महिलाओं में यह आंकड़ा 94.8 प्रतिशत था। अध्ययन में दोनों समूहों के बीच स्तनपान बंद करने की अवधि में भी महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।


कुछ महिलाओं को परेशानी क्यों होती है?


मामला इतना सीधा भी नहीं है। कुछ शोधों में आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली महिलाओं में स्तनपान की अवधि कम देखी गई है। इसके पीछे समय से पहले जन्म, सिजेरियन प्रसव, कम वजन वाले बच्चे और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताएं महत्वपूर्ण कारण हो सकती हैं।


एक अध्ययन में आईवीएफ के बाद सिजेरियन प्रसव और लंबे समय तक चली बांझपन की समस्या को स्तनपान शुरू करने में कठिनाई से जोड़ा गया। शोधकर्ताओं ने ऐसी महिलाओं को प्रसव के बाद अतिरिक्त सहायता देने की जरूरत बताई।


अस्पताल में शुरुआत पर पड़ सकता है असर


2025 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली महिलाओं में अस्पताल से छुट्टी के समय केवल स्तनपान कराने की संभावना कुछ कम पाई गई। हालांकि शोध में यह भी सामने आया कि गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताएं इस अंतर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समझा सकती हैं। शोधकर्ताओं ने आईवीएफ से गर्भधारण करने वाली माताओं को शुरुआती स्तनपान सहायता देने पर जोर दिया।


आईवीएफ के बाद दूध कम आना क्या सामान्य है?


ऐसा मानना सही नहीं है कि आईवीएफ के कारण हर महिला में दूध कम बनता है। दूध बनने और बच्चे को पर्याप्त दूध मिलने पर कई दूसरे कारक असर डालते हैं। प्रसव का तरीका, बच्चे का जन्म समय से पहले होना, बच्चे का वजन और शुरुआती दिनों में स्तनपान की प्रक्रिया इनमें शामिल हैं।


एक अन्य अध्ययन में सहायक प्रजनन तकनीक से गर्भधारण करने वाली महिलाओं में स्तनपान शुरू करने की दर सामान्य गर्भधारण के करीब पाई गई, हालांकि छह महीने तक स्तनपान जारी रखने में अंतर देखा गया। सिजेरियन प्रसव वाली महिलाओं में यह अंतर ज्यादा था।


सबसे जरूरी बात


आईवीएफ से मां बनने के बाद स्तनपान को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। आईवीएफ अपने-आप स्तनपान की राह नहीं रोकता। अगर प्रसव के बाद दूध आने में देरी हो, बच्चा स्तन से ठीक से न लग पाए या बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो, तो शुरुआती दिनों में चिकित्सक या स्तनपान विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।


और एक बात अलग से समझना जरूरी है—बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान कराना और स्तनपान कराते हुए दोबारा आईवीएफ उपचार लेना एक जैसी स्थिति नहीं है। दूसरी बार आईवीएफ की दवाएं शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूरी है, क्योंकि उस समय इस्तेमाल होने वाली दवाओं और महिला के प्रोलैक्टिन स्तर जैसे कारकों का अलग-अलग असर हो सकता है।


विज्ञान का संदेश साफ है: आईवीएफ से बच्चा पैदा होने के बाद मां स्तनपान करा सकती है। अगर कोई परेशानी आती है तो उसका कारण केवल आईवीएफ मान लेना सही नहीं होगा।

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