अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव को और तेज करने का ऐलान किया है। 19 अगस्त को ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने वाली एक बड़ी कार्रवाई की घोषणा करते हुए इसे बेहद व्यापक आर्थिक अभियान बताया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जो देश ईरान के साथ व्यापार या आर्थिक सहयोग जारी रखेंगे, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। अमेरिकी रणनीति का मकसद ईरान की तेल आय, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संपर्कों पर दबाव बढ़ाकर उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है। पहले भी अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर शुल्क और प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे चुका है।
ईरान पहले से ही गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। युद्ध, प्रतिबंध, व्यापार में रुकावट और कमजोर मुद्रा ने वहां महंगाई और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। रॉयटर्स के अनुसार जुलाई में ईरान की महंगाई दर 66 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और खाद्य कीमतों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई।
ट्रंप की नई घोषणा का असर केवल ईरान तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। यदि अमेरिका ईरान के साथ व्यापार करने वाले तीसरे देशों और कंपनियों पर भी कार्रवाई करता है, तो इससे वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
इस कदम से साफ है कि वॉशिंगटन अब ईरान पर सैन्य दबाव के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी निर्णायक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।

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