सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। वर्ष 2026 में सावन का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत आने वाला है। तिथि के समय को लेकर श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि प्रदोष व्रत 24 अगस्त को रखा जाएगा या 25 अगस्त को
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हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि में रखा जाता है और पूजा का विशेष महत्व सूर्यास्त के बाद आने वाले प्रदोष काल में माना जाता है। इसलिए केवल तिथि शुरू होने का समय नहीं, बल्कि प्रदोष काल में त्रयोदशी की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होती है।
2026 में सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 24 अगस्त को दोपहर के बाद शुरू होकर 25 अगस्त तक रहेगी। प्रदोष पूजा के लिए तिथि की स्थिति को देखते हुए व्रत की तारीख तय की जाती है। पंचांग परंपरा के अनुसार 24 अगस्त 2026, सोमवार को सावन का दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा। सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष भी कहा जाएगा, जिससे भगवान शिव की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करें। शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।
हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में तिथि के समय में मामूली अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार प्रदोष काल और त्रयोदशी तिथि का समय जरूर देख लें।

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