कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट स्थित कार्यालय से पार्टी का साइनबोर्ड हटाने को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। 27 अगस्त को कोलकाता नगर निगम और पुलिस की टीम कथित तौर पर अनधिकृत बताए गए टीएमसी के बड़े बोर्ड को हटाने पहुंची। कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में पुलिस, निगम अधिकारियों और टीएमसी नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन सीढ़ियों पर गिर पड़े। ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि 150 से अधिक पुलिसकर्मी बिना अनुमति इमारत में दाखिल हुए। हालांकि घटनाक्रम को लेकर पुलिस और टीएमसी के दावों में अंतर है और पूरे मामले की परिस्थितियां जांच के दायरे में हैं।
अभिषेक बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और अधिकारियों से आदेश की वैधता पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई कथित अवैध होर्डिंग/बिलबोर्ड को हटाने के लिए की गई थी। कार्रवाई के बाद मामले में प्राथमिकी और गिरफ्तारियों की भी खबर सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह सामान्य नगर निगम कार्रवाई थी या राजनीतिक टकराव का नया मोर्चा? साइनबोर्ड हटाने की कार्रवाई अब कानून-व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों की बहस में बदल गई है।

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