इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली छात्रा की याचिका खारिज किए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अदालत ने कहा कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और स्कूल की निर्धारित वर्दी का पालन किया जाना चाहिए।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के आदेश पर असहमति जताई। उन्होंने इसे इस्लाम पर सीधा हमला और मुसलमानों की धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप बताया। ओवैसी ने यह भी कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और इस मुद्दे पर आगे कानूनी लड़ाई की संभावना है।
ओवैसी ने अपने भाषण में संविधान और मनुस्मृति को लेकर भी भाजपा तथा आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
इसी क्रम में उन्होंने हैदराबाद के मौलवी सैयद अलाउद्दीन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंडमान की सेलुलर जेल भेजे गए पहले कैदी वही थे। उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों में मौलवी अलाउद्दीन को 1857 के विद्रोह के दौरान हैदराबाद में ब्रिटिश रेजिडेंसी पर हमले का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति और अंडमान भेजे गए शुरुआती राजनीतिक कैदियों में प्रमुख बताया जाता है।
हिजाब पर ताजा विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता, विद्यालयी अनुशासन और समान वर्दी के अधिकार के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि याचिकाकर्ता इस फैसले को आगे किस कानूनी मंच पर चुनौती देते हैं।

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