इंदौर। आगामी गणेशोत्सव को देखते हुए जिला प्रशासन ने मूर्ति निर्माण और विसर्जन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने पर्यावरण और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए पीओपी तथा रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के निर्माण, बिक्री और परिवहन पर 18 अक्टूबर 2026 तक रोक लगा दी है।
प्रशासन का फैसला केवल मूर्तियों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों को प्रदूषण का केंद्र न बनाया जाए। पीओपी से बनी मूर्तियां पानी में आसानी से नहीं घुलतीं और इनके रंगों में मौजूद रसायन जलजीवों तथा पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत मूर्ति निर्माताओं, विक्रेताओं और आयोजकों को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी मिलने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह है कि प्रशासन ने रोक तो लगा दी, लेकिन जमीनी निगरानी कितनी मजबूत होगी? हर साल त्योहारों के दौरान प्रतिबंधित सामग्री के इस्तेमाल और जलस्रोतों में मूर्तियों के विसर्जन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा; बाजारों, निर्माण स्थलों और विसर्जन स्थलों पर प्रभावी निगरानी भी जरूरी होगी।
आस्था और पर्यावरण को आमने-सामने खड़ा करने की जरूरत नहीं है। परंपरा भी बच सकती है और पर्यावरण भी—बशर्ते प्रशासन सख्ती करे और नागरिक जिम्मेदारी निभाएं। इंदौर की पहचान स्वच्छता के लिए है, इसलिए मूर्ति निर्माण और विसर्जन में भी वही अनुशासन दिखाई देना चाहिए।

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