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51 साल पुराने नियम में बड़ा बदलाव, फडणवीस की बढ़ी ताकत

 


‘सुपर सीएम’ वाली चर्चा पर सरकार की सफाई, जानिए 1975 के नियम से 2026 तक क्या बदला


आयाम बजाज | मुंबई


महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बढ़ी प्रशासनिक शक्तियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार ने 1975 से चले आ रहे रूल्स ऑफ बिजनेस की जगह 2026 के नए नियम अधिसूचित किए हैं। नए नियमों में मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के फैसले को जनहित में पलटने का स्पष्ट अधिकार दिया गया है, बशर्ते इसके कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाएं। यह प्रावधान 14 अगस्त 2026 को अधिसूचित नियमों में शामिल किया गया।



यहीं से ‘सुपर सीएम’ की बहस शुरू हुई। लेकिन महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के फैसलों पर हस्तक्षेप की प्रशासनिक शक्ति पहले से ही थी और नए नियमों को केवल सत्ता केंद्रीकरण के रूप में देखना सही नहीं है। सरकार के अनुसार, संविधान के तहत मंत्रियों को मिली शक्तियां मुख्यमंत्री द्वारा विभागों के आवंटन के साथ सौंपी जाती हैं।


हालांकि, उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड इस कहानी को अधिक पेचीदा बनाते हैं। 3 मार्च 2023 को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने साफ कहा था कि 1975 के नियमों के तहत मुख्यमंत्री को किसी विभागीय मंत्री के फैसले की समीक्षा या उसे बदलने का अधिकार नहीं था। यह फैसला चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की भर्ती से जुड़े मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आदेश के संदर्भ में आया था।


अब 2026 के नियमों में नियम 13(5) के तहत मुख्यमंत्री को न्यायिक मामलों को छोड़कर किसी मंत्री के फैसले को जनहित में पलटने की स्पष्ट शक्ति दी गई है। मुख्यमंत्री को ऐसा करते समय कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा।


यानी असली सवाल यह नहीं कि मुख्यमंत्री के पास ‘सुपर पावर’ थी या नहीं, बल्कि यह है कि 2023 के हाई कोर्ट फैसले के बाद 2026 के नए नियमों ने उस शक्ति को पहली बार स्पष्ट कानूनी आधार दिया है या नहीं।


नए नियमों में मुख्यमंत्री को किसी भी विभाग से दस्तावेज मांगने और महत्वपूर्ण मामलों को मंत्रिमंडल के सामने रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे महाराष्ट्र सरकार की निर्णय प्रक्रिया में मुख्यमंत्री की भूमिका निश्चित रूप से पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है।


अब निगाह इस बात पर होगी कि इस बढ़ी शक्ति का इस्तेमाल प्रशासनिक समन्वय तक सीमित रहता है या महाराष्ट्र में फैसलों के केंद्रीकरण का नया दौर शुरू होता है।

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