क्राइम ब्रांच से करीब 100 मीटर दूर नशे के कथित इस्तेमाल का मामला, पुलिस की निगरानी पर भी सवाल
इंदौर। बौद्धिक प्रतिकार
इंदौर में हाईप्रोफाइल नशे के कथित इस्तेमाल को लेकर एक वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। वीडियो को लेकर आरोप है कि सांसद शंकर लालवानी के करीबी बताए जाने वाले गगन खूबानी के बेटे कृष्णा खूबानी ने एक नाबालिग युवक को कथित तौर पर कोकीन का सेवन कराया। यदि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होती है तो मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि इसमें नाबालिग को नशीले पदार्थ के सेवन की ओर धकेले जाने का आरोप है।
दावा किया जा रहा है कि यह घटना क्राइम ब्रांच कार्यालय से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित महाराजा कॉम्प्लेक्स में हुई। सवाल यही है कि यदि सार्वजनिक स्थान के इतने नजदीक इस तरह की गतिविधि हुई और इसका वीडियो भी बनाया गया, तो पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल क्यों नहीं उठेंगे?
बताया जा रहा है कि वीडियो में एक युवक कथित तौर पर सफेद पाउडर जैसी वस्तु का सेवन करता दिखाई देता है। हालांकि, केवल वीडियो देखकर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि वह पदार्थ वास्तव में कोकीन ही था। इसकी पुष्टि के लिए पुलिस जांच, पदार्थ की जांच और संबंधित लोगों के बयान जरूरी हैं।
नाबालिग को लेकर मामला और गंभीर
सबसे गंभीर आरोप नाबालिग युवक से जुड़ा है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी नाबालिग को जानबूझकर मादक पदार्थ उपलब्ध कराया गया या उसका सेवन कराया गया, तो मामला सामान्य नशाखोरी से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। पुलिस को वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और इस्तेमाल किए गए पदार्थ की जांच करनी चाहिए।
क्राइम ब्रांच की भूमिका पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की सक्रियता को लेकर है। यदि घटनास्थल वास्तव में क्राइम ब्रांच कार्यालय के इतने नजदीक था, तो वहां नियमित निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तंत्र तक जानकारी क्यों नहीं पहुंची? क्या पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया है? क्या घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराई गई है?
नशे के नेटवर्क की भी जांच जरूरी
मामले की जांच केवल वीडियो में दिखाई देने वाले कथित सेवन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी संगठित नशे के नेटवर्क की आशंका है तो पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि कथित पदार्थ कहां से आया, किसने उपलब्ध कराया और किन लोगों तक इसकी पहुंच है।
गगन खूबानी और कृष्णा खूबानी को लेकर लगाए जा रहे अन्य आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। किसी व्यक्ति के राजनीतिक संपर्क या किसी जनप्रतिनिधि से निकटता मात्र से उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हो जाते। इसलिए जांच में रिश्तों या राजनीतिक प्रभाव के बजाय दस्तावेजी साक्ष्य, सीसीटीवी, मोबाइल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और बरामदगी को आधार बनाया जाना चाहिए।
अब असली सवाल पुलिस से है—यदि वीडियो वास्तविक है तो इसकी जांच कब होगी? पदार्थ की पहचान कब होगी? और यदि इसमें नाबालिग शामिल है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

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