नई दिल्ली। आजकल बच्चों के हाथ में मोबाइल और सामने भोजन की प्लेट आम दृश्य बन गया है। खाना खाते समय रील्स या वीडियो देखने की आदत धीरे-धीरे रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन रही है। माता-पिता अक्सर इसे बच्चे को खाना खिलाने का आसान तरीका मानते हैं, लेकिन लगातार स्क्रीन देखते हुए भोजन करने से खाने के व्यवहार और दिनचर्या पर असर पड़ सकता है।
स्क्रीन में ध्यान लगा रहने के कारण बच्चा खाने की गति, मात्रा और पेट भरने के संकेतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता। इससे वह जरूरत से ज्यादा या बहुत जल्दी खाना खा सकता है। तेजी से खाने पर भोजन को अच्छी तरह चबाने की आदत भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कुछ बच्चों में पेट भारी लगना, गैस या अपच जैसी परेशानियां दिखाई दे सकती हैं।
दूसरी चिंता यह है कि वीडियो देखते हुए बच्चा खाने में कितना समय लगा रहा है, इसका भी ध्यान नहीं रहता। अगर भोजन के साथ बार-बार स्क्रीन का इस्तेमाल होने लगे तो बच्चा खाने को मनोरंजन के साथ जोड़ सकता है और बिना मोबाइल के खाना खाने में परेशानी महसूस कर सकता है।
विशेषज्ञ बच्चों के भोजन के समय स्क्रीन-मुक्त माहौल बनाने की सलाह देते हैं। माता-पिता स्वयं भी भोजन के दौरान मोबाइल दूर रखें, ताकि बच्चा उसी व्यवहार को अपनाए। बच्चे को धीरे-धीरे चबाकर खाने, भोजन का स्वाद महसूस करने और भूख-पेट भरने के संकेत समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
हालांकि हर बच्चे में स्क्रीन देखने से पाचन संबंधी समस्या होना तय नहीं है। लेकिन लगातार स्क्रीन के साथ भोजन करना, कम शारीरिक गतिविधि और अनियमित खान-पान मिलकर वजन बढ़ने जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए छोटी उम्र से ही भोजन के समय मोबाइल से दूरी बनाना बेहतर आदत है।

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