इंफाल। मणिपुर के नोनी जिले में प्रतिबंधित संगठन जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ) के दो गुटों के बीच लगातार दूसरे दिन हिंसक झड़प ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार सुबह खुमजी क्षेत्र में जेडयूएफ-जेंचुई और जेडयूएफ-कामसन गुटों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें एक सदस्य की मौत हो गई और छह घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए इंफाल लाया गया है।
इससे एक दिन पहले भी दोनों गुटों के बीच झड़प में जेडयूएफ-कामसन के कथित मुख्य सचिव दिंगतिपलुंग गोनमेई उर्फ न्गुइबा की मौत हुई थी। यानी करीब 24 घंटे के भीतर हुई दो घटनाओं में दो लोगों की मौत और छह लोगों के घायल होने की खबर है। लगातार हो रही गोलीबारी से नोनी-हाओचोंग इलाके में तनाव बढ़ गया है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जेडयूएफ भारत और मणिपुर सरकार के साथ दिसंबर 2022 में युद्धविराम समझौते के तहत आया था। इस समझौते के पालन की निगरानी के लिए संयुक्त निगरानी समूह भी बनाया गया था। इसके बावजूद संगठन के गुटों के बीच हथियारबंद संघर्ष का सामने आना युद्धविराम व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
थौबल में पेट्रोल पंप पर ग्रेनेड हमला
उधर थौबल जिले के खांगाबोक में शनिवार शाम एक तेल पंप पर अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर हथगोला फेंका। विस्फोट में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन तेल टैंकर और पंप की दीवार को नुकसान पहुंचा। हमलावर चार पहिया वाहन से आने की बात सामने आई है।
दो अलग-अलग घटनाएं एक ही संदेश दे रही हैं—मणिपुर में सामान्य स्थिति की वापसी का दावा तभी विश्वसनीय होगा, जब जमीन पर हथियारबंद गुटों की हिंसा और जबरन वसूली जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई दे। प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल हिंसा रोकने की नहीं, बल्कि युद्धविराम समझौतों की शर्तों को जमीन पर लागू कराने की भी है।

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