नई दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया पर "गट हेल्थ" शब्द खूब सुनने को मिलता है। कई लोग इसे सिर्फ पाचन से जोड़कर देखते हैं, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक गट हेल्थ का असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर पड़ता है। पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्तर भी काफी हद तक आंतों की सेहत पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारी आंतों में करोड़ों सूक्ष्म जीवाणु रहते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से "गट माइक्रोबायोम" कहा जाता है। ये अच्छे बैक्टीरिया भोजन को पचाने, जरूरी विटामिन बनाने और शरीर को हानिकारक जीवाणुओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तब गैस, कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और बार-बार संक्रमण जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
गट हेल्थ का सीधा संबंध दिमाग से भी माना जाता है। इसी वजह से कई बार तनाव, चिंता और खराब नींद का असर सबसे पहले पाचन तंत्र पर दिखाई देता है। वहीं लगातार जंक फूड, अत्यधिक चीनी, तली-भुनी चीजें और अनियमित दिनचर्या आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना भोजन में दही, छाछ, मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और पर्याप्त नींद लेना भी गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
ध्यान रखें: अगर लंबे समय तक पेट दर्द, लगातार कब्ज, दस्त, खून आना या तेजी से वजन कम होने जैसी समस्याएं बनी रहें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसे लक्षणों में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।

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