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तेहरान। अमेरिका के लगातार कड़े होते प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के बीच ईरान ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। तेहरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक नाकेबंदी को सामान्य कूटनीतिक कदम मानने से इनकार करते हुए इसे युद्ध जैसी कार्रवाई बताया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि आर्थिक दबाव का असर देश की जनता और व्यापार पर पड़ रहा है, इसलिए इसे केवल राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अमेरिका के प्रतिबंधों ने ईरान के तेल कारोबार, बैंकिंग व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में ईरान अब पश्चिमी दबाव का मुकाबला करने के लिए गैर-पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
इस रणनीति में चीन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग जारी है। तेहरान के लिए चीन पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच आर्थिक सहारे का बड़ा विकल्प बन सकता है।
वहीं यूएई के साथ ईरान के रिश्ते भी बेहद अहम हैं। खाड़ी क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से यूएई ईरान के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर इसका असर खाड़ी के व्यापार और समुद्री मार्गों पर पड़ सकता है।
तुर्किये भी ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संपर्क बना हुआ है। ऐसे में तेहरान की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है—अमेरिकी दबाव के बीच चीन, यूएई और तुर्किये जैसे देशों के साथ आर्थिक और कूटनीतिक रास्ते खुले रखना। आने वाले दिनों में ईरान का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रतिबंध और दबाव किस स्तर तक बढ़ते हैं।

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