यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तर कोरिया और रूस की सैन्य साझेदारी लगातार गहरी होती जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर कोरिया रूस को बड़ी मात्रा में तोप के गोले और अन्य सैन्य सामग्री उपलब्ध करा चुका है। अनुमान है कि रूस को डेढ़ करोड़ से ज्यादा तोप के गोले भेजे जा चुके हैं। इन हथियारों ने यूक्रेन के खिलाफ रूस की लंबी दूरी की तोपखाने की क्षमता को बनाए रखने में मदद की है।
सैन्य सहयोग केवल गोला-बारूद तक सीमित नहीं है। उत्तर कोरिया ने रूस के समर्थन में सैनिक भी भेजे हैं और अब किम जोंग उन अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इससे युद्ध में उत्तर कोरिया की प्रत्यक्ष भूमिका बढ़ने की आशंका है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर कोरिया की मिसाइल तकनीक में देखा जा रहा है। यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल और परीक्षण से उत्तर कोरियाई मिसाइलों की तकनीकी क्षमता, मार्गदर्शन और सटीकता में सुधार होने के दावे सामने आए हैं। रूस से मिलने वाली तकनीक और युद्धक्षेत्र के अनुभव ने उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम को नया बढ़ावा दिया है।
विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात यह है कि रूस को हथियार और सैनिक देने के बदले उत्तर कोरिया को सैन्य तकनीक, अनुभव और अन्य रणनीतिक सहायता मिल सकती है। इससे आने वाले समय में प्योंगयांग की मिसाइल और परमाणु क्षमता और मजबूत होने का खतरा बढ़ रहा है।
यानी यूक्रेन का युद्ध सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रह गया है। रूस-उत्तर कोरिया सैन्य गठजोड़ अब एशिया और यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।

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