नई दिल्ली। अंगदान को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि घर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके सभी अंग दान किए जा सकते हैं। ऐसा नहीं है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार, घर पर मृत्यु होने की स्थिति में हृदय, फेफड़े, यकृत और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों को सामान्य तौर पर प्रत्यारोपण के लिए नहीं निकाला जा सकता। इन अंगों के लिए रक्त संचार बनाए रखना जरूरी होता है और मृतक को अस्पताल में चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत मस्तिष्क-तना मृत्यु घोषित किया जाना आवश्यक होता है।
लेकिन घर पर मृत्यु होने के बाद आंखों की कॉर्निया और कुछ ऊतकों का दान संभव हो सकता है। कॉर्निया मृत्यु के बाद सीमित समय तक उपयोग योग्य रहती है। राष्ट्रीय प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार, मृत्यु के बाद आंखों/कॉर्निया को सामान्यतः 6 से 8 घंटे के भीतर सुरक्षित करने की कोशिश की जाती है। इसके लिए परिजन संबंधित नेत्र बैंक या अधिकृत दल से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। दल जरूरत पड़ने पर मृतक के घर भी पहुंच सकता है।
मृत्यु के बाद परिस्थितियों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर त्वचा, हड्डी, रक्त वाहिकाएं और कुछ अन्य ऊतक भी दान किए जा सकते हैं। हालांकि कौन-सा ऊतक लिया जा सकता है, इसका अंतिम निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच के बाद करते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि घर पर मृत्यु होने के तुरंत बाद स्वयं कोई प्रक्रिया करने की कोशिश न करें। आंखें बंद रखें, आंखों को सूखने से बचाने के लिए साफ गीली रूई या कपड़े से ढकें और सिर को थोड़ा ऊंचा रखें। इसके बाद अधिकृत नेत्र बैंक अथवा संबंधित स्वास्थ्य सेवा से तुरंत संपर्क करें।
यानी सरल भाषा में—घर पर मृत्यु के बाद प्रमुख आंतरिक अंगों का दान सामान्यतः संभव नहीं होता, लेकिन आंखों की कॉर्निया और कुछ ऊतकों का दान परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।

Post a Comment