नई दिल्ली। अच्छी सेहत के लिए सिर्फ खाना खाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि थाली में क्या और कितनी मात्रा में शामिल किया जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने संतुलित खान-पान को आसान बनाने के लिए 5-पी पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य लोगों को रोजमर्रा के भोजन में पोषण का बेहतर संतुलन बनाने के लिए जागरूक करना है।
पहला पी—प्लेट यानी थाली। भोजन की थाली में अलग-अलग खाद्य समूहों को उचित जगह देना जरूरी है। केवल चावल या रोटी पर निर्भर रहने के बजाय सब्जियां, दालें, अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य शामिल किए जाने चाहिए।
दूसरा पी—प्लांट बेस्ड यानी पौधों से मिलने वाला भोजन। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और बीज भोजन का हिस्सा बनाएं। इनमें फाइबर, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं।
तीसरा पी—प्रोटीन। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, अंडा या अन्य उपलब्ध प्रोटीन स्रोतों को रोज के भोजन में शामिल करना शरीर के लिए महत्वपूर्ण है।
चौथा पी—पानी। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी स्वस्थ खान-पान का जरूरी हिस्सा है। मीठे पेय पदार्थों के बजाय सामान्य पानी को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प है।
पांचवां पी—पोर्टशन यानी मात्रा। पौष्टिक भोजन भी जरूरत से ज्यादा खाने पर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए उम्र, शारीरिक गतिविधि और शरीर की जरूरत के अनुसार भोजन की मात्रा तय करना जरूरी है।
याद रखें, स्वस्थ थाली का मतलब महंगा भोजन नहीं, बल्कि सही मात्रा में विविध और संतुलित भोजन है।

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