प्रणव बजाज
ओरछा। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में मिशन-2028 का रोडमैप बनाने के लिए प्रदेशभर के करीब 350 नेता जुटे, लेकिन बैठक के राजनीतिक एजेंडे से ज्यादा चर्चा अगर किसी बात की रही तो वह थी—पार्टी के तीन बड़े चेहरों की तस्वीर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एक ही बैठक में मौजूद रहे, मगर कार्यक्रम के अलग-अलग मौकों पर तीनों के अलग नजर आने की तस्वीरों ने सियासी गलियारों में सवाल खड़े कर दिए।
भाजपा की इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 14 साल बाद ओरछा में प्रदेश कार्यसमिति का आयोजन हुआ है और पार्टी का घोषित एजेंडा अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी, संगठन विस्तार, बूथ मजबूती और युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाना है। यानी मंच पर संदेश साफ है—मिशन-2028 की तैयारी शुरू।
लेकिन सवाल बैठक के भीतर की तस्वीरों से पैदा हुआ। क्या यह महज बैठने की व्यवस्था थी या भाजपा के भीतर बदलते शक्ति-संतुलन की झलक? मोहन यादव सत्ता के केंद्र में हैं, शिवराज अभी भी प्रदेश भाजपा की राजनीति का सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले चेहरों में हैं और सिंधिया का अपना राजनीतिक प्रभाव है। ऐसे में तीनों का एक मंच पर होना जितना सामान्य नहीं, उतना ही उनका अलग-अलग दिखाई देना भी राजनीतिक नजरों से बच नहीं सकता।
हालांकि इसे गुटबाजी का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। बैठक के दौरान तीनों नेताओं ने पार्टी की एकजुटता और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। शिवराज ने रामराज्य को भाजपा का लक्ष्य बताया, जबकि सिंधिया ने ओरछा में बैठक को सकारात्मक और सार्थक परिणाम देने वाला अवसर बताया।
फिर भी राजनीति में कौन किसके साथ बैठा, कौन किसके साथ दिखाई दिया और किससे दूरी नजर आई—इन तस्वीरों के अपने संदेश होते हैं। खासकर तब, जब भाजपा मध्यप्रदेश में अभी से 2028 की चुनावी जमीन तैयार कर रही हो।
अब बड़ा सवाल यही है—ओरछा में भाजपा ने मिशन-2028 का रोडमैप तो बना दिया, लेकिन क्या पार्टी के तीन बड़े चेहरों के बीच भी कोई नया राजनीतिक समीकरण आकार ले रहा है?

Post a Comment