नई दिल्ली। देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर मेजर जनरल गंभीर सिंह ने सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में केवल सेना के भरोसे राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं रखा जा सकता। नागरिक सुरक्षा, पुलिस, स्थानीय समुदाय, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और युवाओं को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक ढांचे से जोड़ना होगा।
टेरिटोरियल आर्मी की ओर से रक्षा और आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए गंभीर सिंह ने कहा कि देश की सीमाओं को मौजूदा और संभावित खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्रीय संप्रभुता की बुनियादी जरूरत है। उनका जोर विशेष रूप से रक्षा की ‘दूसरी पंक्ति’ तैयार करने पर रहा, ताकि किसी बड़े या लंबे समय तक चलने वाले संकट में सशस्त्र बलों पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
उन्होंने उद्योग को आधुनिक तकनीक, स्वदेशी उत्पादन और सैन्य रसद में योगदान देने, जबकि विश्वविद्यालयों को रक्षा अनुसंधान, नवाचार और विशेषज्ञ प्रशिक्षण से जोड़ने की बात कही। युवाओं को भी भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।
गंभीर सिंह के मुताबिक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, नागरिक तैयारी और स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। सुरक्षा चुनौतियां बहुआयामी होती जा रही हैं और ऐसे में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों की भागीदारी देश की सामरिक क्षमता को मजबूत कर सकती है।
**सीमा की रक्षा सिर्फ सरहद पर खड़े जवान की जिम्मेदारी नहीं—देश के भीतर मजबूत व्यवस्था भी राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली जरूरत है।**

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