आयाम बजाज
मुंबई। मुंबई की महापौर रितु तावड़े का छह महीने का कार्यकाल विवादों और राजनीतिक टकराव से घिरता दिखाई दे रहा है। बीएमसी में चार दशक से अधिक समय बाद भाजपा की वापसी के बाद तावड़े ने फरवरी 2026 में महापौर पद संभाला था। लेकिन अब विपक्ष के साथ-साथ बीएमसी प्रशासन, अपनी ही पार्टी के नेताओं और महायुति के सहयोगियों के साथ मतभेद उनके लिए चुनौती बन गए हैं।
कार्यभार संभालने के कुछ ही समय बाद उनकी कथित महंगी घड़ी को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद मार्च में महापौर की सरकारी कार और एस्कॉर्ट वाहन पर लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का मामला उठा। बीएमसी ने नियमों का हवाला देते हुए इन लाइटों को हटवा दिया। अप्रैल में धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उनके एक बयान पर भी विवाद हुआ, जिसे लेकर अंधविश्वास को बढ़ावा देने के आरोप लगे। तावड़े ने बाद में सफाई दी कि उनके बयान को गलत समझा गया।
अगस्त में महापौर के आधिकारिक आवास के आसपास करीब 2.9 करोड़ रुपये के विकास कार्य का प्रस्ताव सामने आने से नया विवाद खड़ा हो गया। तावड़े ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं मांगा और बाद में बीएमसी से प्रस्ताव वापस लेने को कहा। टेंडर रद्द कर दिया गया।
सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा भाजपा के भीतर मतभेद को लेकर है। शिक्षा समिति के कामकाज में कथित हस्तक्षेप को लेकर तावड़े और समिति अध्यक्ष राजश्री शिरवाडकर के बीच तीखी बहस की खबरें सामने आईं। वहीं, शिंदे गुट के उपमहापौर संजय घाड़ी ने भी प्री-मानसून निरीक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी।
इन विवादों के बीच तावड़े ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर बीएमसी प्रशासन में बदलाव की मांग की है। अब सवाल यह है कि मुंबई की सत्ता में भाजपा की नई शुरुआत का चेहरा बनीं तावड़े **प्रशासन और गठबंधन के भीतर तालमेल बैठा पाएंगी या विवाद ही उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान बनेंगे?**

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