मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हीमोग्लोबिन की जांच के लिए उपकरणों की खरीदी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। प्रदेश में 27,052 हीमोग्लोबिन मीटर और क्युवेट की खरीदी के लिए करीब 90.01 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। सवाल उठने के बाद विभाग को यह टेंडर रद्द करना पड़ा।
सबसे चौंकाने वाली बात उपकरण की दर को लेकर सामने आ रही है। आरोप है कि जहां गुजरात में इसी तरह के उपकरण की दर करीब 2 रुपये बताई जा रही है, वहीं मध्य प्रदेश में प्रति जांच 10.52 रुपये की दर प्रस्तावित की गई। यदि दरों की तुलना सही है तो यह अंतर केवल खरीद का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
27 हजार से अधिक उपकरणों की खरीद और 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार एनीमिया मुक्त भारत अभियान को प्राथमिकता देने का दावा करती है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि वाली खरीदी में दरों का तुलनात्मक परीक्षण पहले क्यों नहीं किया गया?
टेंडर रद्द होना अपने आप में कई सवाल छोड़ गया है। अब जरूरी है कि सरकार पूरी प्रक्रिया की जांच कराए, बाजार दर और दूसरे राज्यों में हुई खरीदी का तुलनात्मक ब्योरा सार्वजनिक करे और यह बताए कि 90 करोड़ रुपये के टेंडर की जरूरत, दर और शर्तें किस आधार पर तय की गई थीं।
जनता के पैसे से होने वाली स्वास्थ्य उपकरणों की खरीदी में यदि दरों में इतना बड़ा अंतर है, तो जवाबदेही तय होना जरूरी है।
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