भोपाल। त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और 632 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। जांच में सीबीआई ने हत्या की आशंका को खारिज करते हुए त्विषा की मौत को आत्महत्या बताया है। हालांकि, जांच में सामने आए दहेज प्रताड़ना के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
सीबीआई के अनुसार घटना वाले दिन यानी 12 मई की रात दोनों परिवारों के बीच लगातार फोन कॉल और अन्य माध्यमों से संपर्क हुआ था। जांच में करीब 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट में भी शरीर पर मारपीट या संघर्ष के ऐसे निशान नहीं मिले, जो हत्या की ओर संकेत करते हों।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद 14 मई को त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने तमाम पहलुओं की जांच कर मौत को आत्महत्या माना। रिपोर्ट 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई थी, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में त्विषा की सास एवं पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह तथा पति अधिवक्ता समर्थ सिंह को आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी का दावा है कि ससुराल पक्ष की ओर से कथित दहेज प्रताड़ना और मानसिक दबाव त्विषा की मौत का प्रमुख कारण बना।
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की दहेज हत्या, पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर चालान पेश किया है।
अब सवाल हत्या का नहीं, कथित प्रताड़ना और उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही का है।

Post a Comment