टाटा, महिंद्रा और एचएएल की अहम भूमिका; पुराने एएन-32 विमानों की जगह लेंगे नए विमान
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के पुराने पड़ चुके परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 60 बहुउद्देश्यीय मध्यम परिवहन विमान खरीदने के लिए करीब एक लाख करोड़ रुपए का निविदा प्रस्ताव जारी किया है। यह सौदा केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत में इनके निर्माण और रक्षा विमानन उद्योग को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।
इस प्रतिस्पर्धा में भारतीय कंपनियां अग्रणी भूमिका में रहेंगी। टाटा समूह, महिंद्रा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे भारतीय रक्षा उद्योग के बड़े नाम संभावित साझेदारों के साथ मैदान में हैं। विदेशी विमान निर्माता कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन, एम्ब्रेयर और एयरबस के प्रस्ताव चर्चा में हैं।
पुराने बेड़े को बदलने की जरूरत
वायुसेना लंबे समय से सोवियत दौर के एएन-32 जैसे पुराने परिवहन विमानों पर निर्भर रही है। नए मध्यम परिवहन विमान सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामग्री को तेजी से अग्रिम क्षेत्रों तक पहुंचाने के साथ आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों में भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। प्रस्तावित विमान 18 से 30 टन तक भार ढोने वाली श्रेणी में होंगे।
भारत में बनेगा बड़ा हिस्सा
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका स्वदेशी निर्माण है। योजना के अनुसार शुरुआती कुछ विमान सीधे विदेश से लिए जा सकते हैं, जबकि बड़ी संख्या में विमानों का निर्माण भारत में भारतीय उद्योग की भागीदारी से किया जाएगा। मार्च में रक्षा मंत्रालय से जुड़े अनुमोदन में 12 विमान सीधे लेने और शेष 48 विमानों को भारत में बनाने की योजना सामने आई थी।
इससे भारत को केवल नए परिवहन विमान ही नहीं मिलेंगे, बल्कि विमान निर्माण, रखरखाव, मरम्मत और कलपुर्जा निर्माण के क्षेत्र में भी लंबी अवधि की औद्योगिक क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
मुकाबला सिर्फ विमान का नहीं
इस सौदे में असली मुकाबला विमान की कीमत से कहीं आगे है। जिस कंपनी को अनुबंध मिलेगा, उसके भारतीय साझेदार के साथ उत्पादन, रखरखाव और तकनीकी क्षमता विकसित करने की शर्तें भी महत्वपूर्ण होंगी। यानी करीब एक लाख करोड़ रुपए की यह परियोजना भारतीय रक्षा विमानन उद्योग के लिए आने वाले कई दशकों की दिशा तय कर सकती है।
वायुसेना के लिए यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिवहन विमान युद्ध के समय सैनिकों और सैन्य उपकरणों की त्वरित आवाजाही के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद पहुंचाने की क्षमता का आधार होते हैं। ऐसे में नए विमानों की खरीद को वायुसेना के आधुनिकीकरण की बड़ी कड़ी माना जा रहा है।

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