भुवनेश्वर। जन्म के समय घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उन पांच जिलों की पहचान की गई है जहां लड़कियों का जन्म अनुपात सबसे कमजोर है। इन जिलों में अब विशेष निगरानी, सघन जागरूकता अभियान और कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा, ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जन्म के समय लिंगानुपात में गिरावट केवल सामाजिक असंतुलन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए गंभीर जनसांख्यिकीय चुनौती है। इसी कारण सरकार ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान की रूपरेखा तैयार की है।
इस अभियान के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच, पीसीपीएनडीटी कानून का कड़ाई से पालन, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनजागरूकता तथा बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, महिलाओं की सुरक्षा और कानून का सख्त पालन ही लिंगानुपात सुधारने का सबसे प्रभावी उपाय है। यदि इन पांच जिलों में अभियान सफल रहता है, तो इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
खास बातें
जन्म के समय लिंगानुपात सुधारने के लिए 5 कमजोर जिलों की पहचान।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने पर रहेगा विशेष फोकस।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों और पीसीपीएनडीटी कानून की होगी कड़ी निगरानी।
जागरूकता अभियान में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन मिलकर करेंगे काम।

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