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नासिक कुंभ के ₹25 हजार करोड़ पर सियासी घमासान, संजय राउत के आरोपों पर फडणवीस का पलटवार

आयाम बजाज



मुंबई। वर्ष 2027 में होने वाले नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां शुरू होते ही भारी भरकम बजट को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने कुंभ से जुड़े कामों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों को कुंभ की छवि खराब करने की कोशिश बताया है। 


₹25 हजार करोड़ के कथित घोटाले का आरोप


राउत का दावा है कि सिंहस्थ कुंभ के लिए मंजूर करीब ₹35 हजार करोड़ में से लगभग ₹25 हजार करोड़ की कथित हेराफेरी की तैयारी है। उन्होंने निविदाओं, ठेकों और विकास कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। राउत ने यह भी कहा कि कुंभ की तैयारियों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर साधु-संतों में भी नाराजगी है। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक नेता द्वारा लगाए गए हैं और इनके समर्थन में किसी स्वतंत्र जांच की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। 


सरकारी आंकड़ा क्या कहता है?


यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। केंद्र सरकार को महाराष्ट्र सरकार ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली शिखर समिति ने ₹22,425.39 करोड़ की व्यापक कुंभ विकास योजना को मंजूरी दी थी। योजना के लिए 40 सदस्यीय शिखर समिति और अलग कुंभ मेला प्राधिकरण भी बनाया गया है। 


वहीं मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाल में कुंभ से जुड़े कार्यों के लिए लगभग ₹34 हजार करोड़ के खर्च का बचाव करते हुए कहा कि इसका करीब 93 प्रतिशत हिस्सा स्थायी बुनियादी ढांचे पर खर्च होगा। इसमें सड़कें, जलापूर्ति, मल-जल व्यवस्था, नदी विकास और अन्य नागरिक सुविधाएं शामिल हैं, जिनका लाभ कुंभ के बाद भी नासिक के लोगों को मिलने का दावा किया गया है। 


असली सवाल बजट नहीं, पारदर्शिता का


कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में हजारों करोड़ रुपये का निवेश अपने आप में असामान्य नहीं है, क्योंकि सरकार इसे शहर के दीर्घकालिक विकास से जोड़ रही है। लेकिन इतने बड़े सार्वजनिक खर्च में टेंडर किसे मिले, लागत कैसे तय हुई, काम की गुणवत्ता कौन जांच रहा है और भुगतान किस आधार पर हो रहा है, इन सवालों का स्पष्ट सार्वजनिक जवाब जरूरी है।


मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कुंभ की तैयारियों से जुड़े कुछ काम पहले ही विवादों में आ चुके हैं। हाल में बाढ़ से नासिक की करीब ₹63 करोड़ की नदी तट परियोजना को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई, जिसने निर्माण की गुणवत्ता और आपदा-रोधी योजना पर सवाल खड़े किए हैं। 


फिलहाल ₹25 हजार करोड़ की कथित ‘लूट’ एक राजनीतिक आरोप है, सिद्ध घोटाला नहीं। लेकिन ₹22,425 करोड़ से लेकर ₹34 हजार करोड़ तक सामने आ रहे अलग-अलग आंकड़ों के बीच जनता के पैसे का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना ही इस विवाद का सबसे ठोस जवाब हो सकता है।

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