नई दिल्ली। साइबर ठगी अब सिर्फ मोबाइल कॉल, संदेश या फर्जी निवेश तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के सामने ऐसे संगठित नेटवर्क की तस्वीर सामने आ रही है, जिसमें ठगी की रकम को अलग-अलग खातों से घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे माध्यमों के जरिए विदेश तक पहुंचाया जा रहा है। हाल के मामलों में जांच के दौरान करोड़ों रुपये के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के सुराग मिले हैं।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में 80 मोबाइल नंबर और 15 हैंडसेट ब्लॉक किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसे साइबर अपराध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे निकालने के बजाय कई स्तरों पर खातों और डिजिटल माध्यमों से घुमाया जाता है, जिससे असली संचालकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
देश में साइबर ठगी के बढ़ते खतरे का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार के अनुसार जून 2026 तक साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई जा चुकी थी। हजारों संदिग्ध मोबाइल अनुप्रयोगों को भी कार्रवाई के तहत बंद किया गया है।
एक गलती और खाते से पैसा गायब
साइबर अपराधी कभी पुलिस अधिकारी बनकर, कभी निवेश का लालच देकर और कभी बैंक या सरकारी विभाग का नाम लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल में डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले भी सामने आए हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि अनजान लिंक न खोलें, किसी को बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें और दबाव में आकर रकम ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट करना जरूरी है।
**सवाल अब सिर्फ ठगी रोकने का नहीं, बल्कि उस पैसे की विदेश तक पहुंच रही पूरी श्रृंखला तोड़ने का है।**

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