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साल में सिर्फ 24 घंटे खुलता है नागचंद्रेश्वर दरबार

 

उज्जैन। नागपंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर का दुर्लभ दरबार रात 12 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। कपाट खुलने के साथ ही देशभर से पहुंचे भक्तों का दर्शन क्रम शुरू हुआ। यह मंदिर नागपंचमी पर केवल 24 घंटे के लिए खुलता है और अगले वर्ष की नागपंचमी तक इसके कपाट बंद रहते हैं।



महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा धार्मिक और कलात्मक दृष्टि से बेहद विशिष्ट मानी जाती है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के नीचे विराजमान हैं। प्रतिमा में नागों से जुड़ी कई आकृतियां भी दिखाई देती हैं। इसे 11वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमा बताया जाता है।


तक्षक नाग की तपस्या से जुड़ी मान्यता


मंदिर के साल में सिर्फ एक दिन खुलने के पीछे पौराणिक मान्यता जुड़ी है। कहा जाता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के बाद तक्षक ने महाकाल वन में निवास किया और एकांत साधना की इच्छा जताई। इसी मान्यता के कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट वर्षभर बंद रखने की परंपरा मानी जाती है।


नागपंचमी की रात विशेष पूजा के बाद कपाट खोले जाते हैं और अगले 24 घंटे श्रद्धालुओं को दर्शन मिलते हैं। इस बार नागपंचमी के साथ सावन सोमवार का संयोग भी बना, जिससे उज्जैन में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ी।


यही 364 दिन इंतजार और सिर्फ 24 घंटे दर्शन नागचंद्रेश्वर मंदिर को देश के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

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