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मध्य प्रदेश में 21 आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता, इंदौर-जबलपुर के सरकारी कॉलेज अब भी इंतजार में

भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कॉलेजों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। प्रदेश के पांच शासकीय और 16 निजी आयुर्वेद महाविद्यालयों को मान्यता मिल गई है। हालांकि इंदौर और जबलपुर के शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इससे इन संस्थानों में दाखिले और शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।



प्रदेश में कुल 39 आयुर्वेद कॉलेज संचालित हैं। इनमें बीएएमएस की करीब 2,700 सीटें बताई जा रही हैं। मान्यता मिलने के बाद 21 कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। वहीं जिन कॉलेजों के संबंध में निर्णय लंबित है, वहां छात्रों और अभिभावकों की नजर नियामक संस्थाओं के अगले फैसले पर टिकी है।


इंदौर और जबलपुर के सरकारी आयुर्वेद कॉलेज प्रदेश के प्रमुख आयुर्वेद शिक्षण संस्थानों में गिने जाते हैं। ऐसे में इनकी मान्यता का मामला लंबित रहना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह है कि मान्यता के लिए जरूरी शैक्षणिक ढांचा, चिकित्सकीय सुविधाएं, शिक्षक, अस्पताल और अन्य निर्धारित मानक पूरे करने में कहां कमी रह गई है।


मान्यता प्रक्रिया केवल कॉलेज के अस्तित्व से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। इसलिए लंबित कॉलेजों के संबंध में स्पष्ट कारण और समयबद्ध निर्णय जरूरी है।


अब देखना होगा कि इंदौर और जबलपुर के दोनों सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता कब मिलती है और इस दौरान संभावित विद्यार्थियों के प्रवेश की स्थिति क्या रहती है।

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