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एनीमिया जांच में कीमतों का खेल? गुजरात में 2 रुपये, एमपी में 10.52 रुपये की दर

 


मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हीमोग्लोबिन जांच के उपकरणों की प्रस्तावित खरीदी ने सरकारी खरीद व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही निर्माता कंपनी के उपकरण की जांच लागत गुजरात के वडोदरा में करीब 2 रुपये प्रति टेस्ट बताई गई, जबकि मध्य प्रदेश में यही दर 10.52 रुपये प्रति टेस्ट प्रस्तावित थी। बिहार में यह करीब 13 रुपये और राजस्थान में 20 रुपये तक बताई गई है।



मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन ने 90.01 करोड़ रुपये का टेंडर रद कर दिया। इस टेंडर में 27,052 हीमोग्लोबिन मीटर और बड़ी संख्या में क्युवेट की खरीदी प्रस्तावित थी। दस्तावेजों के मुताबिक मीटर के लिए अनुमानित लागत करीब 5.67 करोड़ और क्युवेट के लिए करीब 88.80 करोड़ रुपये रखी गई थी।


टेंडर में आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स के अधिकृत डीलर कंठाली ट्रेडर्स की बोली न्यूनतम रही। डीलर ने मीटर के लिए 1,997 रुपये और क्युवेट के लिए 9.89 रुपये की दर प्रस्तावित की थी। इसके बावजूद दरों में राज्यों के बीच इतना बड़ा अंतर सामने आना सवाल खड़े करता है।


कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल के अनुसार, डीलर की दरें स्वीकृत नहीं होने के कारण टेंडर निरस्त किया गया। वहीं कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य ठक्कर ने अलग-अलग राज्यों में अलग दरों के सवाल पर कहा कि मामला न्यायालय में है और जवाब वहीं दिया जाएगा।


अब सवाल सिर्फ टेंडर रद होने का नहीं है—सवाल यह है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में एक ही उपकरण और जांच व्यवस्था की दरें अलग-अलग राज्यों में इतनी अलग क्यों हैं? 90 करोड़ की खरीद में दर तय करने का आधार क्या था और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

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