149 करोड़ के स्कूल मेंटेनेंस पर बड़ा सवाल: जांच रिपोर्ट दबाई, 40 अफसरों को नोटिस

मैहर के रामनगर से खुला मामला, जांच में 60 से ज्यादा विकासखंडों तक पहुंची गड़बड़ी; 20 ब्लॉक अब भी जांच के घेरे से बाहर


भोपाल। बौद्धिक प्रतिकार

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में मरम्मत और रखरखाव के नाम पर खर्च किए गए करीब 149 करोड़ रुपए अब सवालों के घेरे में हैं। मामला सिर्फ कथित वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। जांच के बाद तैयार रिपोर्ट के विधानसभा और संबंधित मंत्री तक नहीं पहुंचने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब लोक शिक्षण संचालनालय ने करीब 40 अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गड़बड़ी 60 से ज्यादा विकासखंडों में सामने आई है, तो बाकी 20 ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी अब तक जांच के दायरे से बाहर क्यों हैं?



रामनगर से खुला 149 करोड़ के खेल का रास्ता


मामले की शुरुआत मैहर जिले के रामनगर विकासखंड से हुई। यहां स्कूलों की मरम्मत के नाम पर करीब 4.37 करोड़ रुपए खर्च दिखाए गए। जांच में 18 से अधिक स्कूलों में वास्तविक काम नहीं होने के बावजूद भुगतान किए जाने की बात सामने आई। भवन मरम्मत के अलावा पार्किंग, सड़क और साइकिल स्टैंड जैसे काम भी रिकॉर्ड में दर्ज किए गए थे।


जांच में भुगतान और सामग्री आपूर्ति को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 को काम को मंजूरी मिलने के बाद अगले ही दिन से सामग्री की आपूर्ति दिखाई गई और महीने के अंत से पहले काम पूरा होना दर्ज कर दिया गया। भोपाल, सतना और मैहर की कुछ फर्मों को भुगतान किए जाने का उल्लेख भी जांच में सामने आया है।


विधानसभा में मामला उठा, रिपोर्ट फिर कहां गई?


मामला विधानसभा के बजट सत्र में उठने के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जांच के आदेश दिए। तीन सदस्यीय समिति ने जून के अंतिम सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। लेकिन रिपोर्ट विधानसभा और मंत्री तक नहीं पहुंची। बाद में रिपोर्ट स्कूल शिक्षा विभाग से लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंची और इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई।


यहीं से पूरा मामला और गंभीर हो जाता है। सवाल यह नहीं है कि सिर्फ पैसा गलत तरीके से खर्च हुआ या नहीं। सवाल यह भी है कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर तैयार जांच रिपोर्ट आखिर किस स्तर पर रोकी गई और क्यों?


40 अफसरों को नोटिस, लेकिन 20 अभी बाहर


लोक शिक्षण संचालनालय ने अब तक 40 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें वित्तीय प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी और विकासखंड स्तर के आहरण-संवितरण अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है। अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि जांच रिपोर्ट समय पर उच्च स्तर तक क्यों नहीं पहुंची।


लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक कथित गड़बड़ी 60 से अधिक विकासखंडों तक फैली हुई है। ऐसे में 40 अधिकारियों को नोटिस और करीब 20 ब्लॉक के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होना अपने आप में बड़ा सवाल है।


असली जांच अभी बाकी?


जांच समिति ने मामले में कई लोगों की संभावित भूमिका की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय जांच और जिला स्तर पर भी विस्तृत जांच की जरूरत बताई है। इसके बावजूद अभी तक कार्रवाई मुख्य रूप से नोटिस तक दिखाई दे रही है।


सरकारी स्कूलों के रखरखाव के लिए जारी पैसा सीधे बच्चों और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा है। यदि कागजों पर काम पूरा दिखाकर भुगतान किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी केवल किसी एक कर्मचारी या अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकती। भुगतान की स्वीकृति, सामग्री की आपूर्ति, काम के सत्यापन और अंतिम भुगतान—हर स्तर की भूमिका की जांच जरूरी है।


अब सरकार से पांच सीधे सवाल


पहला—149 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी का पूरा दायरा क्या है?


दूसरा—जांच रिपोर्ट विधानसभा और मंत्री तक समय पर क्यों नहीं पहुंची?


तीसरा—60 से ज्यादा ब्लॉक में मामला सामने आने के बावजूद केवल 40 अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों?


चौथा—बाकी 20 ब्लॉक की जांच कब होगी?


पांचवां—जिन स्कूलों में काम कागजों पर पूरा दिखाया गया, वहां भौतिक सत्यापन कब कराया जाएगा?


इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि स्कूलों की मरम्मत के लिए निकला पैसा वास्तव में स्कूलों तक पहुंचा था या फाइलों और फर्मों के बीच ही रास्ता बदल गया? इसका जवाब अब सिर्फ विभागीय नोटिस से नहीं, बल्कि विकासखंडवार जांच, भुगतान का लेखा-परीक्षण और जिम्मेदारी तय होने से मिलेगा।


नोट: 149 करोड़ रुपए, 60 से अधिक ब्लॉक और 40 अधिकारियों को नोटिस संबंधी विवरण उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। दोष सिद्ध होने तक संबंधित अधिकारियों/फर्मों को कथित गड़बड़ी के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

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