नई दिल्ली। देश के विमानन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अडानी समूह अपनी खुद की विमान सेवा शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके लिए समूह उस नियम में बदलाव चाहता है, जिसके तहत हवाई अड्डों का संचालन करने वाली कंपनियों को विमानन सेवा संचालित करने वाली एयरलाइन में हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मौजूदा हवाई अड्डा निजीकरण समझौतों में आवश्यक संशोधन की संभावनाओं पर कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रही है। यदि नियमों में बदलाव होता है, तो अडानी समूह के लिए अपनी विमान सेवा शुरू करने का रास्ता खुल सकता है।
वर्तमान में अडानी समूह देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन कर रहा है। यदि उसे विमान सेवा संचालित करने की अनुमति मिलती है, तो घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। इसका सीधा मुकाबला एयर इंडिया, इंडिगो और अन्य निजी विमानन कंपनियों से होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए खिलाड़ी के आने से यात्रियों को बेहतर सेवाएं, अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी किराए का लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और हितों के टकराव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। नियमों में बदलाव और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अडानी समूह भारतीय विमानन क्षेत्र में अपनी नई एयरलाइन सेवा शुरू कर पाएगा या नहीं।

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